भाषा और व्याकरन
मनुष्य को
समाज मे अपने भावो और वीचरो को दूसरो तक पहुंचाने की आवश्यकता पडती है। मनुष्य के
भाव और विचार ध्वनियों के माध्यम से दूसरों तक पहुँचते हैं। मनुष्य ऐसी ध्वनियों
का उच्चारण जिन्हें सुनकर सुनने वाला (श्रोता ) बोलने वाले (वक्ता) के विचारों या
भावों को गृहण कर सके।
- ·
भाषा की उत्पत्ती ‘भाष’ धातु से हुई है
जिसका अर्थ है, बोलना
- · भारत के संविधान में 18 भाषाओं को मान्यता दिया गया है। हिंदी हमारी मातृभाषा मानी जाती है।
- ·
संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषा है। इसे ‘देववाणी’ भी कहते हैं।
वर्ण
मन मे उठने
वाले विचारों को प्रकट करने के लिए हमारे मुख से ध्वनियाँ निकलती हैं। इन ध्वनियों
को विशेष चिन्हों के रूप में कागज़ पर अंकित कर लिया जाता है। मूल ध्वनियों का यह लिपिबद्ध रूप ही ‘वर्ण’ कहलाता है। किसी भाषा के समस्त
वर्णों का व्यवस्थित व क्रमबध्द समूह वर्णमाला कहलाताहै।
उदाहरण
कमल =
क्+अ+म्+अ+ल्+अ
नमक =
न्+अ+म्+अ+क्+अ
केला =
क्+ए+ल्+आ
शरबत =
श्+अ+र्+अ+ब्+अ+त्+अ
|
वर्ण-भेद
वर्ण निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं –
1 स्वर 2
व्यंजन
(1)
स्वर – स्वतंत्र रूप से बोले जाने वाले या बिना दूसरे वर्ण की
सहायता से बोले जाने वाले वर्ण ‘स्वर’ कहलाते हैं। इनमे कुल 11 शब्द होते हैं।
अ आ इ ई उ ऊ
ऋ ए ऐ ओ औ
स्वरों की मात्राएँ
स्वर
|
अ
|
आ
|
इ
|
ई
|
उ
|
ऊ
|
ऋ
|
ए
|
ऐ
|
ओ
|
औ
|
मात्राएँ
|
&
|
k
|
f
|
h
|
q
|
w
|
`
|
s
|
S
|
¨
|
©
|
‘अ’ स्वर की
कोई मात्रा नहीं होती। यह हलंत रहित प्रत्येक व्यंजन में विद्यमान रहता है।
(1) व्यंजन – जिन वर्णों का उच्चारणकरते समय हवा रुकावट के साथ मुख से
निकल ती है, और उनके स्पष्ट उच्चारणमें स्वरों की सहायता लेनी पड्ती है, उन्हें ‘व्यंजन’ कहते
है।
व्यंजन 3 प्रकार के होते है-
क ख ग
घ ³
च छ ज
झ ´
ट ठ ड
ढ ण
त थ द
ध न
प फ ब
भ म
|
स्पर्श व्यंजन (25)
|
य र ल
व
|
अंतःस्थ व्यंजन (4)
|
श ष स
ह
|
ऊष्म व्यंजन (4)
|
उपसर्ग एवं प्रत्यय
उपसर्ग= शब्दों के पहले लगाये जाने वाले शब्दों को ‘उपसर्ग’ कहा जाता है, इसे
स्वतंत्र रूप से प्रयोग नही किया जा सकता।
उदाहरण :- प्र+हार =
प्रहार
प्र+बल = प्रबल
अप+मान = अपमान
अ+ज्ञान =
अज्ञान
प्रत्यय= शब्दों के अंत में लगाये जाने वाले शब्दों को ‘प्रत्यय’ कहा जाता है
उदाहरण :- मोटा+पा =
मोटापा
पागल+पन = पागलपन
माया+वी
= मायावी
लेख+क
= लेखक
समास
समास = दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया यौगिक शब्द बनाने
को समास कहते हैं। (किसी लम्बे वाक्य को संक्षिप्त मे कहना ही समास होता है )
उदाहरण :- शक्ति के अनुसार = यथाशक्ति
सत्य के लिए आग्रह = सत्याग्रह
रसोई के लिए घर =रसोईघर
आदर के साथ = सादर
समास के भेद
सामान्य रूप से भेद तथा उपभेद मिलाकर समास छ्ह प्रकार का होता है –
1.अव्ययीभाव समास 2. तत्पुरूष समास 3.
कर्मधारय समास
4. द्विगु समास 5.
द्ववंद्व समास 6. बहुव्रीहि
समास
1.अव्ययीभाव समास= जिस समस्तपद मे पूर्व पद प्रधान हो और उसके योग से समस्त्पद
भी अव्यय बन जाए, वह अव्ययीभाव समास
कहलाता है।
उदाहरण :- आजन्म =
जन्मभर
प्रतिदिन = प्रत्येक दिन
भरपूर = पूरा भारा हुआ
यथासमय = ठीक समय पर
2. तत्पुरूष समास= जिस सामाजिद पद
में दूसरा पद प्रधान हो,
उसे तत्पुरूष समास कहते हैं। इस समासमें पहले पद के विभक्ति-चिन्ह हटा दिए जाते
हैं अर्थात उनका लोप हो जाता है,
जैसे – संसद का भवन = संसद भवन।
पहले पद ‘संसद का’ विभक्त-चिन्ह ‘क’ का लोप हो गया है।
तत्पुरूष समास छ्ह प्रकार का
होता है। ये प्रकार छ्ह कारकों की विभक्तियों के अनुसार होते हैं। तत्पुरूष समास
में जिस कारक के विभक्ति-चिन्ह का लोप हो जाता है, उसी के अनुसार उसका नाम पड जाता है।
तत्पुरूष समास के प्रकार-
1. कर्म तत्पुरूष – यश्प्राप्त = यश को प्राप्त
2. करण – शोकाकुल = शोक से आकुल
3. संप्रदान – आरामकुर्सी = आराम के लिए कुर्सी
4. अपादान – धर्म विमुख = धर्म के विरुद्ध
5. संबंध – सेनापति = सेना का पति
6. अधिकरण – गृहप्रवेश = गृह में प्रवेश
3. कर्मधारय समास= जिस
समास का पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
उदाहरण :- महाराज =
महान है जो राजा
लालगुलाब = लाल है जो गुलाब
नीलगाय = नीली है जो गाय
अंधकूप = अंधा है जो कूप (कूंआ)
4. द्विगु समास= इस समास में पूर्वपद संख्यावाचक होता है और किसी समूहका बोध
कराता है।
उदाहरण :- सप्ताह =
सात दिनों का समूह
चौराहा = चार राहों का समूह
तिरंगा = तीन रंगों का समूह
चतुर्भुज = चार भुजाओं का समूह
5. द्ववंद्व समास= जिस समस्त्पद में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करने पर ‘एवं’ , ‘और’, ‘तथा’ आदि लागता हो, वह द्ववंद्व समास कहलाताहै।
उदाहरण :- अन्न-जल
= अन्न एवं जल
पूर्व-पश्चिम = पूर्व और पश्चिम
हार-जीत = हार और जीत
राजा-प्रजा = राजा और प्रजा
6. बहुव्रीहि समास= जिस समस्त्पद में कोई भी पद प्रधान न होकर कोई अन्य ही पद
प्रधान हो, बहुव्रीहि समास
कहलाता है। इस समास द्वारा बनने वाला पद विशेषण का कार्य करता है।
उदाहरण :- नीलकंठ =
नीले कंठों वाला (शिव)
चक्र्धर = चक्र को धारण करने वाला (कृष्ण)
विषधर = विष को धारण करने वाला (साँप)
दशानन = दश मुख है जिसके (रावण)
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