Monday, May 25, 2020

भाषा और व्याकरन


संधि

संधि= दो वर्णों के मेल से जो परिवर्तन घटित होता है, उसे संधि कहते हैं।
उदाहरण :-         भोजन+आलय      = भोजनालय
                         विद्या + अर्थी        = विद्यार्थी
                         देव + इंद्र            = देवेंद्र
                         गिरि + ईश          = गिरीश  

संधियाँ तीन प्रकार की होती हैं –
1. स्वर संधि                       2. व्यंजन संधि            3. विसर्ग संधि



1. स्वर संधि= दो स्वरों के मेल से उत्पन्न विकार को स्वर संधि कहते हैं। इसके अंतर्गत पहले शब्द का अंतिम वर्ण तथा दूसरे शब्द का पहला वर्ण स्वर होता है, और ये परस्पर मिलकर नया रूप धारण करते हैं।
उदाहरण :-         राजा + इंद्र           = (आ+इ)   = राजेंद्र
                         दीप + अवली       = (आ+अ)   =दीपावली



2. व्यंजन संधि= जब पहले शब्द के अंत में कोई व्यंजन होता है और दूसरे शब्द के प्रारंभ में स्वर या व्यंजन कोई भी वर्ण होता है, तब वहाँ व्यंजन संधि होती है।
उदाहरण :-         जगत + ईश        = जगदीश
                         दिक +अम्बर       = दिगम्बर

3. विसर्ग संधि= पहले शब्द के अंत में विसर्ग और दूसरे शब्द के प्रारंभ में स्वर या व्यंजन से होने वाले मेल को विसर्ग संधि कहते हैं।
उदाहरण :-         निः + रव            = नीरव
                         नमः + कार        = नमस्कार


स्वर संधि के भेद
स्वर संधि के पाँच भेद होते हैं –

1. दीर्घ संधि – एक ही जाति के स्वरों के निकट आने पर उनके मेल से उसी जाति का दीर्घ स्वर बन जाता है। यह मेल दीर्घ संधि कहलाता है ।
उदाहरण :-         अ+अ = आ  – अधिक + अधिक   = अधिकाधिक
                          इ+इ = ई     – रवि + इंद्र            = रवींद्र 
 
2. गुण संधि – यदि या के बाद या हो, दोनो के स्थान पर , यदि या हो, तो दोनों के स्थान पर और यदि हो, तो अर् हो जाता है। इसे गुण संधि कहते है।

उदाहरण :-         अ+इ         = ए      –    नर + इंद्र            = नरेंद्र 
                        आ+इ         = ए     –    यथा + इष्ट           = यथेष्ट
                        अ+उ         = ओ    –    पर + उपकर       = परोपकार
                        अ+ऋ        = अर्   –   सप्त + ऋषि          = सप्तर्षि 

3. वृद्धि संधि -  जब या के बद या हो, तो दोनों वर्ण मिलकर हो जाते हैं, तथा या के बद या होने पर हो जाते हैं। इन वर्णों के इस प्रकार मेल को वृद्धि संधि कहते हैं।
उदाहरण :-         अ+ए        = ऐ    –     एक + एक          = एकैक
                        आ+ए        = ऐ    –     तथा + एव           = तथैव
                        अ+औ       = औ  –     परम + औषध      = परमौषध
                        आ+औ      = औ  –     महा + औषधि      =महौषधि  

4. यण् संधि – या के बाद इससे भिन्न कोई स्वर हो, तो या के स्थान पर य् हो जाता है। या के पश्चात इससे भिन्न कोई स्वर हो तो या का व् हो जाता है और के पश्चात के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर हो, तो का र् हो जाता है। 
उदाहरण :-        यदि + अपि         = यद्यपि
                        नि + ऊन           = न्यून
                        पितृ +उपदेश      = पित्रुपदेश
                        सु + अल्प           =स्वल्प 

5. अयादि संधि – ,,’, या के बद यदि कोई विजातीय स्वर आ जाए, तो का अय्’, का अव् और का आव् हो जाता है। ऐसी संधि को अयादि संधि कहते हैं।
उदाहरण :-        ए + अ       = अय्                        चे + अन     = चयन
                        ऐ + अ       = आय्                       नै + अक    = नायक
                        ओ + अ     = अव्                        गै + अक    = गायक 

नोट :- संधि और समास में अंतर – संधि वर्णों को मिलाकर उन्हें संक्षिप्त करती है, परंतु समास शब्दों की विभक्तियाँ हटाकर उन्हें संक्षिप्त करता है।


लिंग
लिंग= शब्द के जिस रूप से यग पता चलता है कि वह पुरुष जाति का है या स्त्री जाति का, उसे व्याकरण में लिंग कहते हैं।
लिंग दो प्रकार के होते हैं –
1. पुल्लिंग          2.  स्त्री लिंग

1. पुल्लिंग= संज्ञा शब्द के जिस रूप से पुरुष जाति का बोध होता है, वह पुल्लिंग कहलाता है।
उदाहरण :- पुत्र, दादा, सूर्य, बंदर, कुत्ता, बैल, कबूतर, हाथी आदि ।

2. स्त्री लिंग= संज्ञा शब्द के जिस रूप से स्त्री जाति का बोध होता है, वह स्त्रीलिंग  कहलाता है।
उदाहरण :- गंगा, बकरी, कुर्सी, औरत, रानी आदि।

नोट :- हिन्दी में दो ही लिंग माने गए हैं – स्त्रीलिंग और पुल्लिंग। हिन्दी में लिंग-प्रयोग अन्य भाषाओं की अपेक्षा कठिन हैं, क्योंकि इसने अप्राणिवाचक संज्ञाओं को भी स्त्रीलिंग और पुल्लिंग माना गया है।            

वचन
वचन= शब्द के जिस रूप से उसकी संख्या एक या एक से अधिक होने का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।

वचन के दो भेद होते हैं –
1. एकवचन                        2. बहुवचन

1. एकवचन= जिस शब्द से एक प्राणी, वस्तु या पदार्थ का बोध होता है, उसे एकवचन कहते हैं।
उदाहरण :- बेटा, रोटी, पुस्तक, मेज आदि।

2. बहुवचन= जिस शब्द से एक से अधिक प्राणियों, वस्तुओ या पदार्थों का बोध होता है, उसे बहुवचन कहते हैं।
उदाहरण :- बेटे, रोटियाँ, पुस्तकें, मेजें आदि।

विशेष :- कभी-कभी कुछ परिस्थितियों में एकवचन शब्द के स्थान पर बहुवचन शब्द-रूपों का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण :- 1. महाराणा प्रताप वीर पुरुष थे।
                2. दादा जी अखबार पढ रहे हैं।
                3. तुम क्या कर रहे हो ?

नोट :-  लोक व्यवहार/सम्मान प्रकट करने के लिए एकवचन के स्थान पर बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। 



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